“बजट-सत्र में लायेंगे लोकपाल विधेयक !”
इसी टाल भी सकते हैं क्या, सिर्फ़ क़यामत के आने तक ??
राज्यसभा में हंगामा !
किसने ख़ुद के कपड़े फाड़े, औरों का फाड़ा पज़ामा ??
लटक गया लोकपाल बिल !
लोकपाल से गले मिले तो, घड़ियाली आँसू लेकर मिल !!
वर्ष भर नक्सली सक्रिय रहे !
नेता जिनको पाल रहे हों, उनकी महिमा कौन कहे !!
घायल दरोगा !
घायल कर्ताओं ने सोचा, होगा अपने घर का होगा !!
“पहले ही तैयारी करनी चाहिए थी सरकार को !”
इसी तरह तो यूज़ किया, उसने अपने अधिकार को !!
लंगूरनी का उत्पात !
नेतानी होती तो संसद, में इस पर चलती कुछ बात !!
संसद में हंगामा योजनाबद्ध था !
लालू ने जिसको भेजा था, वह भी काफ़ी वृद्ध था !!
दिल्ली में कड़ाके की ठंड !
संसद में लेकिन गर्मी थी, शोलों से भी अधिक प्रचंड !!
घना हुआ कोहरा !
ख़ुद को ख़ुद ही ढूँढ रहे थे, रामभरोसे लाल वोहरा ??

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